थायराइड होने के कारण लक्षण और निवारण
थायरॉइड ग्रंथि को एक अवटु ग्रंथि से भी मना किया जाता है। अवटु या थायरॉयड ग्रंथि मानव शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी अतास्राव ग्रंथि में से एक होगा।
यह आपके द्विपिंडक रचना में हमारे गले में जो स्वरयंत्र के नीचे क्रिकॉइड कार्टिलेज है, उसके लगभग समान स्तर पर स्थित होता है।
यह आपकी थायरॉइड ग्रंथि ट्राई-आयोडोथायरोनिन (T3) और थायरोकैल्सीटोनिन (T4) और TSH नामक हार्मोन का स्राव करती है। ये हमारे शरीर के हार्मोन्स में नारियल दर भी अन्य विकास तंत्रों का प्रभाव डालते हैं। हमारे शरीर में भी थायराइड हार्मोन की गति को नियंत्रित कर दिया जाता है।
थायराइड के प्रकार
थायराइड के दो है जिनको कहते हैं हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड। दोनों में ही जो आपकी समस्या है वो अलग-अलग प्रकार की देखी गई है और दोनों की अवस्थाओं में भी अलग-अलग प्रकार की समस्याएं हैं। इन दोनों में थाइरॉयड के भी लक्षण अलग-अलग दिख गए हैं।
हाइपरथायराइड (Hyperthyroidism) - हाइपरथायराइड ग्रेव्स रोग का एक बड़ा कारण है। जिसमें आयुर्वेदिक ग्रंथ बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं और आपके हार्मोन्स का जो प्रोडक्शन है वो सबसे ज्यादा करने लगता है। इसका कारण यह भी है कि घेंघा रोग में आपके गुर्दे के ग्रंथी का भी आकार बढ़ जाता है। इसके अलावा इसमे नोड्यूल्स के कारण भी यह स्थिति पैदा होगी। कुछ मामलों में आपके प्रिय का मात्रा भी अधिक सेवन हो सकता है। इस स्थिति के लिए आप जिम्मेदार भी हो सकते हैं।
हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) -जो आज कल इंसान में हो जाने वाले रोग की भी स्थिति रहेगी जो आपके थायरायड के हार्मोन के उत्पादन का भी कारण बनता है।
जब आपके शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है तो आयोडीन की कमी भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में भी वर्ष लगभग महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद भी प्रभावित किया जाता है। स्नातक ये भी होता है कि धीरे-धीरे स्नातक में मन जाएगा।
थायराइड के कारण
थायराइड की समस्या में कई कारक योगदान करते हैं। जैसे:-
आयोडीन की कमी थायराइड की स्थिति में काफी योगदान देती है, लेकिन हाल के दिनों में इसमें सुधार हुआ है। आयोडीन की कमी के कारण थायराइड की कम समस्याएँ सामने आ रही हैं।
ऑटोइम्यून रोग जैसे ग्रेव्स रोग (जो हाइपरथायरायडिज्म का कारण बनता है) या हाशिमोटो रोग (हाइपोथायरायडिज्म का कारण बनता है) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, विशेष रूप से थायरॉयड ग्रंथि पर हमला कर सकता है।
थायरॉयड ग्रंथि की जीवाणु या वायरल सूजन।
थायरॉइड में सौम्य गांठें।
थायरॉयड ग्रंथि में कैंसर या ट्यूमर।
विकिरण चिकित्सा, थायराइड सर्जरी और कुछ दवाएं भी थायराइड की समस्याओं में योगदान कर सकती हैं।
थायराइड रोगों के प्रति आनुवंशिक जोखिम।
कभी-कभी, गर्भावस्था भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकती है और थायराइड की समस्या पैदा कर सकती है।
थायराइड रोग का उपचार
आपके डॉक्टर का लक्ष्य आपके थायराइड हार्मोन के स्तर को सामान्य करना है। यह विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है और प्रत्येक उपचार आपकी थायरॉयड स्थिति के कारण पर निर्भर करेगा। यदि आप थायराइड हार्मोन (हाइपरथायरायडिज्म) का उच्च स्तर से परेशान है, तो उपचार के विकल्पों में शामिल हो सकते हैं:–
एंटी-थायराइड दवाएं (मेथिमाज़ोल और प्रोपाइलथियोरासिल): ये ऐसी दवाएं हैं जो आपके थायरॉयड को हार्मोन बनाने से रोकती हैं।
रेडियोधर्मी आयोडीन (Radioactive iodine): यह उपचार आपके थायरॉयड की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे थायराइड हार्मोन के उच्च स्तर को बनाने से रोका जा सकता है।
बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers): ये दवाएं आपके शरीर में हार्मोन की मात्रा में बदलाव नहीं करती हैं, लेकिन ये आपके लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद करती हैं।
सर्जरी (Surgery): उपचार का एक अधिक स्थायी रूप, आपका डॉक्टर आपके थायरॉयड (थायरॉइडेक्टोमी) को शल्यचिकित्सा से हटा सकता है। यह इसे हार्मोन बनाने से रोकेगा। हालांकि, आपको अपने शेष जीवन के लिए थायरॉयड प्रतिस्थापन हार्मोन लेने की

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